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Showing posts from 2020

ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम :-

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ए ॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम :- (भारत के पूर्व राष्ट्रपति ,परमाणु वैज्ञानिक एवं मिसाइलमैन के नाम से प्रसिद्ध ) अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम (15 अक्टूबर 1931 – 27 जुलाई 2015) इन्हे मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के नाम से जाना जाता है, भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता (इंजीनियर) के रूप में विख्यात थे। उन्होंने सिखाया जीवन में चाहें जैसे भी परिस्थिति क्यों न हो पर जब आप अपने सपने को पूरा करने की ठान लेते हैं तो उन्हें पूरा करके ही रहते हैं। अब्दुल कलाम मसऊदी के विचार आज भी युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है। इन्होंने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक और विज्ञान के व्यवस्थापक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) संभाला व भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे। इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में 'मिसाइल मैन' के रूप में जाना जात...

धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस,दीक्षाभूमि का इतिहास और आंदोलन:-

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धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस:- (भारतीय बौद्ध का प्रमुख त्योहार) धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस भारतीय बौद्धों का एक प्रमुख उत्सव है। दुनिया भर से लाखों बौद्ध अनुयाई एकट्ठा होकर हर साल अशोक विजयादशमी एवं 14 अक्टूबर के दिन इसे मुख्य रुप से दीक्षाभूमि, महाराष्ट्र में मनाते हैं। इस उत्सव को स्थानीय स्तर पर भी मनाया जाता है। धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस, दीक्षाभूमि:- 20वीं सदी के मध्य में डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर ने अशोक विजयादशमी के दिन १४ अक्टूबर १९५६ को नागपुर में अपने ५,००,००० अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था। डॉ॰ आंबेडकर ने जहां बौद्ध धम्म की दीक्षा ली वह भूमि आज दीक्षाभूमिके नाम से जानी जाती है। डॉ॰ आंबेडकर ने जब बौद्ध धर्म अपनाया था तब बुद्धाब्ध (बौद्ध वर्ष) २५०० था। विश्व के कई देशों एवं भारत के हर राज्यों से बौद्ध अनुयाई हर साल दीक्षाभूमि, नागपुर आकर धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस १४ अक्टूबर को एक उत्सव के रूप में मनाते हैं। यह त्यौहार व्यापक रूप से डॉ॰ आंबेडकर के बौद्ध अनुयायियों द्वारा मनाया जाता है। डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर ने यह दिन बौद्ध धम्म दीक्षा के चूना क्योंकि इसी दिन ईसा पूर्व ३ री सदी में सम्राट अ...

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989:-

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अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989:- ( भारतीय संसद द्वारा पारित अधिनियम) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम 1989 को 11 सितम्बर 1989 में भारतीय संसद द्वारा पारित किया था, जिसे 30 जनवरी 1990 से सारे भारत में लागू किया गया। यह अधिनियम उस प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होता हैं जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का सदस्य नही हैं तथा वह व्यक्ति इस वर्ग के सदस्यों का उत्पीड़न करता हैं। इस अधिनियम मे 5 अध्याय एवं 23 धाराएँ हैं।        भारत सरकार ने दलितों पर होने वालें विभिन्न प्रकार के अत्याचारों को रोकनें के लिए भारतीय संविधान की अनुच्छेद 17 के आलोक में यह विधान पारित किया। SC/ST ACT में छुआछूत संबंधी अपराधों के विरूद्ध दण्ड में वृद्धि की गई हैं तथा दलितों पर अत्याचार के विरूद्ध कठोर दंड का प्रावधान किया गया हैं। SC/ST ACT के अन्तर्गत आने वालें अपराध संज्ञेय गैरजमानती और असुलहनीय होते हैं।   SC/ST ACT उस व्यक्ति पर लागू होता हैं जो अनुसूचित जाति(SC), अनुसूचित जनजाति(ST) का सदस्य नहीं हैं और इस वर्ग के सदस्यों पर अत्...

मान्यवर कांशीराम साहेब जी का जीवन परिचय :-

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 मान्यवर कांशीराम साहेब जी का जीवन परिचय :- ( भारतीय राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता, समाज सुधारक) कांशीराम (15 मार्च 1934– 9 अक्टूबर 2006) भारतीय राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे। उन्होंने भारतीय वर्ण व्यवस्था में बहुजनों के राजनीतिक एकीकरण तथा उत्थान के लिए कार्य किया। इसके अन्त में उन्होंने दलित शोषित संघर्ष समिति (DS 4), 1971 में अखिल भारतीय पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदायों कर्मचारी महासंघ (बामसेफ) और 1984 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की स्थापना की। बहुजन समाज पार्टी :-के संस्थापक और अध्यक्ष पद बहाल:-(१९८४ – १९९५) उत्तरा धिकारी:-मायावती होशियारपुर से भारतीय सांसद पद बहाल:-(१९९६ – १९९८) पूर्वा धिकारी कमल चौधरी उत्तरा धिकारी कमल चौधरी इटावा से भारतीय सांसद पद बहाल:-(१९९१ – १९९६) पूर्वा धिकारीराम सिंह शक्यउत्तरा धिकारीराम सिंह शक्य  जन्म:-१५ मार्च १९३४ पिर्थीपुर बुंगा ग्राम, खवसपुर, रूपनगर जिला, पंजाब (भारत) मृत्यु:-९ अक्टूबर २००६ (आयु ७२ वर्ष) नई दिल्ली राजनीतिक दल :-बहुजन समाज पार्टी धर्म:-सिख (जन्म)      :-बौद्ध धर्म (इच्छा के अनुसार अंतिम संस्कार) जालस्थल :-आधिकारिक...

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी का जीवन परिचय और शिक्षा:-

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  भीमराव आम्बेडकर  :- (गणराज्य भारत के निर्माता, संविधानशिल्पी, समाजसुधारक, प्रथम कानून एवं न्याय मंत्री) भीमराव रामजी आम्बेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1956), डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे।उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मंत्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माता थे। आम्बेडकर विपुल प्रतिभा के छात्र थे। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालयऔर लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स दोनों ही विश्वविद्यालयों से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधियाँ प्राप्त कीं तथा विधि, अर्थशास्त्रऔर राजनीति विज्ञान में शोध कार्य भी किये थे। व्यावसायिक जीवन के आरम्भिक भाग में ये अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे एवं वकालत भी की तथा बाद का जीवन राजनीतिक गतिविधियों में अधिक बीता। तब आम्बेडकर भारत की स्वतन्त्रता के लिए प्रचार और चर्चाओं में शामिल हो ग...

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी के महात्मा गांधी से संबन्ध एवं विचार:-

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डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी के महात्मा गांधी से संबन्ध एवं विचार: - 1920 के दशक में आंबेडकर विदेश में पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे और सामाजिक क्षेत्र में कार्य करना आरम्भ किया। उस वक्त महात्मा गांधीने कांग्रेस पार्टी की अगुवाई में आजादी के आंदोलन शुरु कर दिया था। 14 अगस्त, 1931 को आंबेडकर और गांधी की पहली मुलाकात बंबई के मणि भवन में हुई थी। उस वक्त तक गांधी को यह मालूम नहीं था कि आंबेडकर स्वयं एक कथित ‘अस्पृश्य’ हैं। वह उन्हें अपनी ही तरह का एक समाज-सुधारक ‘सवर्ण’ या ब्राह्मण नेता समझते नेता थे। गांधी को यही बताया गया था कि आंबेडकर ने विदेश में पढ़ाई कर ऊंची डिग्रियां हासिल की हैं और वे पीएचडी हैं। दलितों की स्थिति में सुधार को लेकर उतावले हैं और हमेशा गांधी व कांग्रेस की आलोचना करते रहते हैं। प्रथम गोलमेज सम्मेलन में आंबेडकर की दलीलों के बारे में जानकर गांधी विश्वास हो चला था कि यह पश्चिमी शिक्षा और चिंतन में पूरी तरह ढल चुका कोई आधुनिकतावादी युवक है, जो भारतीय समाज को भी यूरोपीय नजरिए से देख रहा है। जब गांधी की हत्या हुई थी तो घटनास्थल पर पहुँचने वालों में सबसे पहले व्यक्ति आंबेडकर ही थे और ...

डॉ बाबासाहेब आम्बेडकर का परिवार :-

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  आम्बेडकर परिवार :- डॉ बाबासाहेब आम्बेडकर का परिवार आम्बेडकर परिवार भीमराव आम्बेडकर का परिवार हैं, जो मराठी मूल का है। सकपाल (मराठी: सकपाळ) ये आम्बेडकर परिवार का मूल उपनाम (सरनेम) था। वर्तमान स्थिती में, आम्बेडकर के वंशज राजनितीक, सामाजिक एवं अन्य क्षेत्र में कार्य कर रहे है। भीमराव आम्बेडकर, जिन्हें डॉ॰ बाबासाहेब आम्बेडकर के नाम से भी जाना हैं, के एक ही पुत्र यशवंत आंबेडकर हैं (उनके अन्य चार बच्चो की मृत्यू बचपन में ही हो गई थी)। आम्बेडकर ने दो शादियाँ की, उनकी पहली पत्नी रमाबाई आम्बेडकर तथा दुसरी पत्नी डॉ॰ सविता आम्बेडकर थी। फरवरी 1935, राजगृह (मुंबई) में आंबेडकर परिवार; (बाई ओर से) यशवंत (पुत्र), भीमराव आम्बेडकर (स्वयं), रमाबाई (पत्नी), लक्ष्मीबाई (भाई की पत्नी), मुकुंदराव (भाई का बेटा) व टॉबी (कुत्ता):- डॉ॰ बाबासाहेब आम्बेडकर एव डॉ॰ सविता आम्बेडकर, 14अप्रेल 1948, दिल्ली :- पुत्र यशवंत (लेफ्ट) व भतीजा मुकुंद (राईट) के साथ डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर:-

भारतीय संसद की संपूर्ण जानकारी:-

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  भारतीय सांसद:- भारत का राष्ट्रीय द्विसदनीय विधायिका भारतकी  संसद  (अथवा  पार्लियामेंट )  भारतदेश  की  विधानपालिका  का सर्वोच्च निकाय है। यह  द्विसदनीय व्यवस्था है। भारतीय संसद में  राष्ट्रपति  तथा दो सदन-  लोकसभा  (लोगों का सदन) एवं  राज्यसभा  (राज्यों की परिषद) होते हैं। राष्ट्रपति के पास संसद के दोनों में से किसी भी सदन को बुलाने या स्थगित करने अथवा लोकसभा को भंग करने की शक्ति है। भारतीय संसद का संचालन ' संसद भवन ' में होता है। जो कि  नई दिल्ली  में स्थित है। राज्यसभा को उच्च सदन एवं लोकसभा को निम्न सदन कहा जाता है। परंतु यह केवल व्यवहार मे कहा जाता है। क्योंकि भारतीय संविधान मं कही भी लोकसभा के लिए निम्न सदन एवं राज्य सभा के लिए उच्च सदन शब्द का प्रयोग नही किया गया है। लोक सभा में राष्ट्र की जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं जिनकी अधिकतम संख्या ५५० है। राज्य सभा एक स्थायी सदन है जिसमें अधिकतम सदस्य संख्या २५० है। राज्य सभा के सदस्यों का निर्वाचन / मनोनयन ६ वर्ष के लिए होता है। जिसके १/३ स...